नई दिल्ली: दुनिया में किसी भी मां-बाप की यह चाहत होती है कि उसकी संतान खूबसूरत हो रंग रूप अच्छा हो स्वस्थ और तंदुरुस्त हो ताकि उनकी पीढ़ी उनका वंश आगे अच्छे से चल सके। इसके लिए मां-बाप हर तरह के उपाय करते हैं। भारत में ऐसा ही एक गांव है जहां हजारों किलोमीटर का सफर तय कर मां-बाप आते हैं अच्छी संतान के लिए।

प्रेग्नेंसी टूरिज्म (Pregnancy Tourism) ये बात सुन कर आपको हैरानी हो सकती है। हमारे देश में एक इलाका ऐसा भी है जहां प्रेग्नेंसी के लिए सात समंदर पार से महिलाएं आती हैं। हालांकि कुछ लोग इसे कपोल कल्पित मानते हैं लेकिन आए दिन यह खबरें सुनने को मिलती रहती हैं। इंटरनैशनल चैनल अल जजीरा, ब्राउन हिस्ट्री और कर्ली टेल्स जैसी एजेंसियों की माने तो लद्दाख में एक इलाका (Ladakh Pregnancy Tourism) के लिए काफी मशहूर है।

लद्दाख की राजधानी लेह से करीब 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बियामा, डाह, हानू, गारकोन, दारचिक जैसे कुछ गांव हैं, इस इलाके में लगभग 5,000 लोग निवास करते हैं। यहीं योरोप की महिलाएं प्रेग्नेंसी के लिए आती हैं।

इस इलाके के बारे में आपको बता दे कि यहां विशेष समुदाय के कुछ लोग निवास करते हैं। इन्हें ब्रोकपा (Brokpa community) के नाम से जाना जाता है। इतिहासकार मानते हैं कि ब्रोकपा कम्यूनिटी ही एक मात्र शुद्ध आर्य (Pure Aryans) हैं। यानी उनकी रगों दौड़ता खून शुद्ध आर्यों का है। इसी लिए योरोप की महिलाएं यहां प्रेग्नेंसी के लिए आती हैं।

जानकार बताते हैं कि शुद्ध आर्य बीज ग्रहण करने के लिए यहां महिलाएं आती हैं, जिससे उनकी होने वाली संतान का रूप-रंग उन्हीं लोगों जैसा हो। यही वजह है कि इस इलाके में आने वाले टूरिस्ट प्रेग्नेंसी टूरिज्म के लिए आती हैं।