मात्र 4 लाख रूपए में खरीदें maruti CNG कार, फीचर्स में भी बलेनो से धांसू

देश की नंबर-1 कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के पास सबसे बड़ा पोर्टफोलियो भी है। उसके पास हैचबैक, SUVs, MPVs के सबसे ज्यादा मॉडल हैं। इसमें कई अफॉर्डेबल कार भी शामिल हैं। देश की सबसे सस्ती कार एस-प्रेसो (कीमत 3.50 लाख रुपए) भी मारुति के पास है। वहीं, ऑल्टो (कीमत 3.70 लाख रुपए), सेलेरियो (कीमत 4.70 लाख रुपए) जैसे कई सस्ते मॉडल मौजूद है। इतना ही नहीं, हैचबैक सेगमेंट पर राज करने वाली वैगनआर और स्विफ्ट की एक्स-शोरूम कीमतें भी 6 लाख रुपए से काफी कम है। हालांकि, अब कंपनी एक नई एंट्री लेवल कार लाने की योजना बना रही है। इसे खास तौर पर पहली बार कार खरीदने वालों के लिए डिजाइन किया जा रहा है। अगर ये कंपनी के पोर्टफोलियो की नई एंट्री लेवल कार हुई तब इसकी कीमत 4 लाख से कम हो सकती है।

दरअसल, करंपनी देश के अंदर छोटी कारों के सेगमेंट में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करना चाहती है। कंपनी ने बताया कि यह मॉडल खास तौर पर भारत के लिए डिजाइन किया जाएगा और अपनी ‘मल्टी-पाथवे स्ट्रैटजी’ के तहत इसमें कई तरह के पावरट्रेन ऑप्शन मिलेंगे। इनमें माइल्ड-हाइब्रिड, फ्लेक्स-फ्यूल और CNG भी शामिल होगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मारुति ‘अफॉर्डेबल’ और ‘एक्सेसबिलिटी’ पर अपना ध्यान और भी ज्यादा फोकस्ड कर रही है। खासकर उन ग्राहकों के लिए जो टू-व्हीलर से कार पर अपग्रेड कर रहे हैं।

GST 2.0 से छोटी कार की कीमतें काफी कम हुईं
कंपनी कम कीमत, बेहतर माइलेज और अल्टरनेटिव फ्यूल ऑप्शन को मिलाकर, पहली बार कार खरीदने वालों के बीच अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। सितंबर 2025 में GST 2.0 लागू होने के बाद इस स्ट्रैटजी के शुरुआती सकारात्मक संकेत दिखने लगे हैं। GST 2.0 के तहत 4 मीटर से छोटी कारों पर टैक्स की दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई थी। इससे एंट्री-लेवल सेगमेंट में कारों की कीमत आम लोगों की पहुंच में आ गई है और खरीदारों की दिलचस्पी फिर से जाग उठी है।

मारुति को FY26 के 11 महीने में 7.6% की ग्रोथ मिली
कंपनी द्वारा निवेशकों के साथ शेयर की गई डिटेल के मुताबिक, इसका नतीजा यह हुआ है कि सितंबर-दिसंबर 2025 की अवधि में पहली बार कार खरीदने वालों की हिस्सेदारी बढ़कर 48% हो गई है, जो अप्रैल-अगस्त की अवधि में लगभग 40% थी। यह दर्शाता है कि कम बजट वाले ग्राहकों के बीच कारों की मांग में स्पष्ट रूप से सुधार हो रहा है। इसके बावजूद, छोटे कारों का सेगमेंट अभी भी स्ट्रक्चरल दबाव का सामना कर रहा है, भले ही कारों की कुल बिक्री में सुधार हो रहा हो। मारुति सुजुकी ने फाइनेंशियल ईयर 26 के पहले 11 महीनों (अप्रैल-फरवरी) में कुल 2.20 मिलियन यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल इसी अवधि में हुई 2.04 मिलियन यूनिट्स की बिक्री के मुकाबले 7.6% ज्यादा है।

मारुति की सेगमेंट वाइज सेल्स
घरेलू बिक्री (जिसमें पैसेंजर व्हीकल, हल्के कमर्शियल व्हीकल और OEM सप्लाई शामिल हैं) में 3.2% की बढ़ोतरी हुई और यह 1.80 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पैसेंजर व्हीकल की बिक्री 2.9% बढ़कर 1.66 मिलियन यूनिट्स हो गई। इसके अंदर, यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट ही बिक्री में बढ़ोतरी का मुख्य जरिया बना रहा, जिसमें 4.6% की वृद्धि हुई और यह 689,631 यूनिट तक पहुंच गया।

इसके विपरीत, ‘मिनी सेगमेंट’ की बिक्री में 11.9% की गिरावट आई और यह 100,550 यूनिट्स तक सिमट गया। यह दर्शाता है कि एंट्री-लेवल कारों की मांग में अभी भी कमजोर है। कॉम्पैक्ट सेगमेंट में 4.6% की बढ़ोतरी हुई और यह 736,313 यूनिट्स तक पहुंच गया। इसमें वैगनआर, स्विफ्ट, डिजायर और बलेनो जैसे मॉडल्स की अच्छी बिक्री का योगदान रहा। मिड-साइज सेडान सेगमेंट में 74.4% की भारी गिरावट देखी गई, जो SUVs की ओर बढ़ते रुझान को दिखाता है।

एंट्री और कॉम्पैक्ट सेगमेंट में मारुति की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। इसकी छोटी कारों की रेंज में मिनी सेगमेंट में ऑल्टो K10 और एस-प्रेसो जैसे मॉडल्स शामिल हैं, जबकि कॉम्पैक्ट कैटेगरी में सेलेरियो, वैगनआर, स्विफ्ट, डिजायर, बलेनो और इग्निस जैसे मॉडल्स उपलब्ध हैं। ये सभी पेट्रोल और CNG, दोनों ऑप्शन में मिलते हैं। पैसेंजर गाड़ियों के मामले में भारत में लंबे समय तक ग्रोथ की काफी संभावनाए हैं। भारत में हर 1000 लोगों पर सिर्फ 30 गाड़ियां हैं, जबकि चीन में यह आंकड़ा लगभग 223 और अमेरिका में 755 से ज्यादा है।

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